Tuesday, April 30, 2024

वेहम

जो हकीक़त है वो ख़ाबों के लिए खोते हैं 
ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 
असल में खाब का अंजाम ऐसा होता है 
दौड़ते भागते हम जागते न सोते हैं 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

किसी के हैं बोहोत किसी के ख़ाब थोड़े हैं 
कौन बिखरे हुए ख़ाबों को फिर से जोड़े है 
हर कोई देखता ज़रूर है मगर फिर भी 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

ख़ाब इक प्यास है हकीक़त से नहीं मिटती 
वो कहानी है जो किसी से भी नहीं मिलती 
ये वेहम उम्र भर हम शाम-ओ सहर बोते हैं 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

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