Friday, April 19, 2024

प्यास आँखों की

तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

सब्र कर लेंगे क़यामत का और क़िस्मत का 
तुझको ऍ दोस्त हम दोस्ती सिखा देंगे 

राह में तेरी हम ऐसे मुंतज़िर होंगे 
दिल को धड़कते ही रहने की हम सज़ा देंगे 

आईना उम्र की दहलीज़ें जब दिखाएगा 
घर से अपने हम हर आईना हटा देंगे 

इस दफ़ा ना सही लेकिन ये तो होगा इक दिन 
तुझको हर हाल मे हम बस अपना बना लेंगे 

तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

No comments:

Post a Comment

राम भजन

धियान न लागे मोरा राम  का करूँ सोहे तोरा नाम  गलियाँ फिरत हूँ चारों पहर अब  तोरा नाम जपन मोरा काम  धियान न लागे मोरा राम ... जो सुख तोरे नाम...