Wednesday, October 25, 2006

ज़माने बिता दिये

मिल्ने की ख्वाहिशों में ज़माने बिता दिये
और जब वो मिल गया तो ज़माने बिता दिये

छोटी सी बात कहने की इक आरज़ू मेरी
छोटी सी बात कहने में ज़माने बिता दिये

सांसें तो चल रही थी मगर जी नहीं सके
मरने की ख्वाहिशों में ज़माने बिता दिये

है प्यार क्या खबर है ज़माने को आजकल
जिसकी थी आरज़ू वो ज़माने बिता दिये

बच्पन की याद को किया मासूम दिल ने फिर
बच्पन की कोशिशों में ज़माने बिता दिये

पाने की आरज़ू थी जिसको ऎ ज़िन्दगी
उसकी ही आरज़ू में ज़माने बिता दिये

बारिश की आस दिल को तसल्ली दिला गई
बादल को देख कर ही ज़माने बिता दिये

कहते हैं प्यार में विवेक रुसवाईयां भी हैं
रुसवाई के सबब में ज़माने बिता दिये

Monday, October 9, 2006

मैनें मै पी है आज आंखों से

मैनें मै पी है आज आंखों से
ज़िन्दगी जी है आज आंखों से

जो बात कह न सका कर न सका लफ़्ज़ों से
वो बात की है आज आंखों से

इक हसीं रात जिसे देख्नने की कोशिश थी
वो देख्न ली है आज आंखों से

जिस तसल्ली के लिये ठोकरें खाई थी कभी
वो तुमने दी है आज आंखों से

जो वासतों का, सबब का सवाल करते थे
वो हमन्शीं हैं आज आंखों से

उस्की बेताब सी नज़रों में मौज की लहरें
कैसे ठहरी हैं आज आंखों से

एक दिन ख्नाब में साक़ी से क्या कही थी विवेक
वही कही थी जो कही है आज आंखों से

ये भी हमें मालूम न था

सच और झूठ किसे कहते हैं
ये भी हमें मालूम न था
हम किस्के घर में रहते हैं
ये भी हमें मालूम न था

रात का साथी दिन को बिछ्ड़ा
तो कुछ बाद्ल घिर आये
दिन और रात इसे कहते हैं
ये भी हमें मालूम न था

घर की याद कभी जब आई
तो आई की याद आई
घर पे मां तनहा रहती है
ये भी हमें मालूम न था

थोड़ी दूर पे दैर-ओ-हरम है
फिर भी भटकते हैं सारे
कौन ख़ुदा है कौन तमाशा
ये भी हमें मालूम न था

कैसी क़सद है कैसी क़सद है
जीना मरना दूभर है
जीते रहना अपनी सज़ा है
ये भी हमें मालूम न था

बारिश से बचकर जो निकले
फ़िसलन से ना बच पाये
सबके नसीब में येही लिखा है
ये भी हमें मालूम न था

ख़ुद अपने ही हाथों सूली
चढ़ने की ठानी हमनें
दुनियादारी एक सज़ा है
ये भी हमें मालूम न था

तुमको क्या मालूम है कहते
तुम तो ठहरे अनजाने
दुनिया को मालूम है सबकुछ
ये भी हमें मालूम न था

ज़र

Bahr: 
  • 2122
  • 1122
  • 22


  • क्या कहें रंग ज़माने वाले
    दोस्त होते हैं रुलाने वाले 
    नाम को अपने तेरे अपने हैं 
    और होते हैं निभाने वाले 

    कोई अशरफ़ नहीं होता है यहाँ 
    बस दिखाते हैं दिखाने वाले 

    दिल का अस्तर तो है पुर्ज़ा पुर्ज़ा 
    फिर भी आते हैं सिलाने वाले 

    ज़ख्म नासूर ही बन जाएगा 
    जब उठाएंगे गिराने वाले 

    तुम भी चुप ना रहो दे दो ताने 
    तुम भी तो ठहरे ज़माने वाले 

    ज़र जमा सर पे यहाँ है लेकिन 
    भूल जाते हैं ये जाने वाले 

    सब के लब सिल गए इसके माने 
    अब न आएंगे वो आने वाले 

    लोटते हैं ये मेरे दिल पे सदा 
    कौन हैं गश्त लगाने वाले 

    रहनुमा बन के तेरे आएंगे 
    इक ग़लत राह दिखाने वाले 

    कैसे अब होगी सुभा रातों की
    खुद ही सोये हैं जगाने वाले 

    दर्द होता नहीं बातों से तेरी 
    बात बदलो ऐ चिढ़ाने वाले 

    क्या मिटाएंगे मेरी तकलीफें 
    दूर से पास बुलाने वाले 

    ====

    अब तलक लौट के आते ही रहे 
    मुझको लेकर कहीं जाने वाले 

    चुप रहो और परेशां ना करो 
    हमसे कहते हैं सताने वाले 





    ======================================================


    Kya kahen rang zamaane waale
    Kaise hotay hain shabaane waale [shabana = of night]
    Apne hote hain waadashikan aksar [waadashikan = one who voids promise]
    Gair hotay hain nibhaanay waale

    Ta umar aur zara chand fuloos [fuloos = money]
    Kaun rukta hai yahan
    Tum bhi ho jaanay waale

    Dil ka astar to purza purza hai [astar = base]
    Phir bhi aatay hain silaanay waale

    Koi ashraf nahi hotaa hai yahaan [ashraf = gentleman]
    Bas dikhaatay hain dikhaane waale

    Asliyat ko bhi jaan jaaogay
    Aa gaye gar nahi aane waale

    Harkatein ki to ungliyaan uthheen
    Tum bhi to thehray zamaane waale

    Ab talak laut ke aatay hi rahe
    Hamko lekar kahin jaanay waale

    Hamse matlab to ban chuka sabka
    Ab kahan saath nibhaanay waale

    Goonjtee hain dhadkanen meree
    Kaun hain gasht lagaane waale

    Kya tasalli mujhay dilaayenge
    Door se paas bulaane waale

    Kaise aatay hain rehnuma ban kar
    Ek galat raah dikhaane waale

    Chup raho aur pareshaan na karo
    Hamse kehte hain sataane waale

    Hamne ye pyaar to naahaq hi kia
    Aaj kehte hain bataane waale

    Phir kabhi aake zara dekh to le
    Ik dafa shakl dikhanay waale

    Dam bharo ya na bharo kuchh bhi karo
    Ud hi jaatay hain na aaneay waale

    Raat bhar jaaganay ki koshish may
    So hi jaatay hain jagaanay waale

    Chaaho to waada hamsay kar lo magar
    Aur hotay hain nibhaanay waale

    Aaj khaaye hain taaza zakhm Vivek
    Wo khaday hain na jalaanay waale

    Dil me aaye to sher likhtay gaye
    Ab sunaayengay inhe gaane waalay

    दुश्मन से प्यार


    Bahr: 
  • 2122
  • 1212
  • 22

  • इश्क़ की हद को पार कर बैठा 
    दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा 
    उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार 
    आँख दो से मैं चार कर बैठा 

    दिल सम्भाला था एक अरसे से
    अब इसे तार तार कर बैठा
     
    ये जो होता खुमार उतर जाता 
    रिन्द सर पे सवार कर बैठा 

    बात जिसने थी रात काली की
    आज फिर दिन में याद कर बैठा
     
    क्या हुआ क्या पता क्या होता है
    धड़कनें बेशुमार कर बैठा

    इक सिफ़त हो तो मैं बताऊँ तुझे 
    उनकी आँखें मैं याद कर बैठा 

    बात ईमान की जो की उसने  
    मुझको वो बे इ मान कर बैठा 

    इश्क़ की हद को पार कर बैठा 
    दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा 


    ==================================


    Ishq ki hud ko paar kar baitha
    Pyar ke baad pyaar kar baitha
    Log aadil ki baat karte hain [aadil = judgement]
    Galatiyan baar baar kar baitha

    Unke aate hi sar-e-bazm-e-mazaar
    Aankh do se mai chaar kar baitha

    Dil sambhala tha ek arse se
    Ab isay taar taar kar baitha

    Aisi baatein jo rat jagaati mujhay
    Din dihaade mai yaad kar baitha

    Kya hua kya pata kya hota hai
    Dhadkanaen beshumaar kar baitha

    Ik sifat ho to mai bataaoon Vivek
    Unki aankhen mai yaad kar baitha

    Ishq ki hud ko paar kar baitha
    Pyar ke baad pyaar kar baitha

    अफ़वाही ज़िंदगी

    किसको है मिला सुकूँ   किसको है मिली ख़ुशी   अफ़वाही है, अफ़वाही है   अफ़वाही ज़िंदगी   ख़ुशियों की जुस्तजू में   हर कोई मिला दुखी   अफ़वाही ...