Tuesday, November 18, 2025

नख़रे

आँखें तुम्हारी पढ़ कर हम बातें तुम्हारी कह देंगे 
लगने लगा है हम सारे नख़रे तुम्हारे सह लेंगे 

पलकें बुझाने से भी तुम मुझको भुला क्या पाओगे 
सपने तेरे चुरा कर हम आँखों में तेरी टहलेंगे 

तुम हाँ कहो या ना कहो मर्ज़ी तुम्हारी है देखो 
जो ना कहो अकेले ही हम ज़िंदगी भर रह लेंगे 

नीयत है दिल की 'ज़ाहिर' पानी सी साफ़ ओ साथी 
तुम जिस तरह से चाहोगे हम उस तरह से बह लेंगे 



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आँखें तेरी ये पढ़ कर हम बातें तुम्हारी कह देंगे

लगने लगा है हम सारे नख़रे तुम्हारे सह लेंगे


फेरो गे मगर तुम अपनी नज़रों को हमसे है ज़ाहिर

सपनों में तेरे आकर हम आँखों में तेरी टह लेंगे


मर्ज़ी तेरी है अर्ज़ी को तू हाँ कहे या ठुकरा दे

ठुकरा भी दे तो हम भी ठोकर में तेरी रह लेंगे


नीयत है दिल की 'ज़ाहिर' पानी सी साफ़ ओ साथी

तुम जिस तरह से चाहोगे हम उस तरह से बह लेंगे



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आँखें तेरी ये पढ़ कर हम बातें तुम्हारी कह देंगे

लगने लगा है हम सारे नख़रे तुम्हारे सह लेंगे


फेरो जो नज़र तुम अपनी गर कहीं ऐसा कुछ फिर हो

सपनों में तेरे आकर हम आँखों में तेरी टह लेंगे


मर्ज़ी तेरी है अर्ज़ी को तू हाँ कहे या ठुकरा दे

ठुकरा भी दे तो हम भी ठोकर में तेरी रह लेंगे


नीयत है दिल की 'ज़ाहिर' पानी सी साफ़ ओ साथी

तुम जिस तरह से चाहोगे हम उस तरह से बह लेंगे



अफ़वाही ज़िंदगी

किसको है मिला सुकूँ   किसको है मिली ख़ुशी   अफ़वाही है, अफ़वाही है   अफ़वाही ज़िंदगी   ख़ुशियों की जुस्तजू में   हर कोई मिला दुखी   अफ़वाही ...