जो ऊपर आसमाँ देखूं तो लगता है के पागल हूँ
जो नीचे फर्श पे देखूं तो लगता है के घायल हूँ
जो आँखें बंद कर बैठूं तो लगता है के कायर हूँ
जो ख़ुद में झांकता हूँ तो
समझता है के मैं तुम हूँ
समझता है के मैं तुम हूँ
समझता है के मैं तुम हूँ
तुझे कोई नाम कैसे दूँ
तुझे कोई रूप कैसे दूँ
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी
के जो तू है वो मैं भी हूँ
के जो तू है वो मैं भी हूँ
के जो तू है वो मैं भी हूँ
मैं पागल हूँ मैं घायल हूँ
मैं कायर हूँ समझता हूँ
मगर खुद को ये कहकर मैं
तुझे बदनाम कैसे करूँ
तुझे बदनाम कैसे करूँ
तुझे बदनाम कैसे करूँ
मैं अब से सोचता हूँ खुद से मिन्नत खुद ही करता हूँ
मुझे जो चाहिए खुद मैं ही खुद से मांग सकता हूँ
ये मुश्किल है के आसान है
आज़मा कर ज़रा देखूं
आज़मा कर ज़रा देखूं
आज़मा कर ज़रा देखूं
तुझे कोई नाम कैसे दूँ
तुझे कोई रूप कैसे दूँ
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी
के जो तू है वो मैं भी हूँ
के जो तू है वो मैं भी हूँ
के जो तू है वो मैं भी हूँ
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