Saturday, April 13, 2024

किताबी फूल

करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो 
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो
इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो 

लिखता है कहानी तो लिख कर तू भूल जा 
खुद को ही कहानी का किरदार मत करो 

थोड़ा तो आज़मा लो कहते हैं तजरुबे  
एक तरफ़ा कभी प्यार बे शुमार मत करो 

खायेगा फिर से धोखा अगर प्यार करेगा 
खुद से ही अब खुद को गद्दार मत करो 

कमज़ोर सा ये दिल है, है ये मोम से बना 
अंगार से जला के तार तार मत करो 

इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता 
ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो 
करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो 
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो

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