Wednesday, January 29, 2025
खून जलता है
Friday, January 24, 2025
होता है
Sunday, January 12, 2025
उजाला
Thursday, January 9, 2025
तोता
आबशार
ग़म ए दिल में हूँ हवाओं के बे-क़रार में हूँ
या कहो जान ए तमन्ना मैं तेरे प्यार में हूँ
ये तिरा साथ जो मिल जाए तो शिफ़ा ही मिले
यूँ मचलकर के मैं उड़ने के इंतज़ार में हूँ
[शिफ़ा = रोग से मुक्ति]
है किसे फ़िक्र ज़माने की बात कौन सुने
तिरे होठों से ये कह दो मैं एतबार में हूँ
[एतबार = trust]
ये भवें तेरी नज़र तेरी तेरी चाल बला
है ख़ुदा पहले मगर मैं भी हुस्न कार में हूँ
[हुस्न कार = creator of the beauty]
ये तो 'ज़ाहिर' है के ज़िंदा हूँ आस पे ही तेरी
आजकल शामों सहर तेरे रोज़गार में हूँ
मैं तो तेरे ही पिघलते से इंतज़ार में हूँ
ले मुझे जीत मुसलसल मैं अपनी हार में हूँ
है मुझे तिश्नगी क्या जाने किस जनम की जज़ा
के जनम ले के तिरे बार-ओ-आबशार में हूँ
[तिश्नगी = तपन, जज़ा = बदला, बार = rain, आबशार = झरना]
Wednesday, January 8, 2025
चाहो
जितना ज़्यादा मिल जाता है उतना पाने को रोता है
कहते हैं के इस दुनिया में जो सोता है वो खोता है
मुझको तो ऐसा लगता है जो खोता है वो सोता है
Tuesday, January 7, 2025
सपना
सब है पराया रखना क्या है
ग़म हैं किसी के अपना क्या है
उम्र गुज़ारी खुल गई आँखें
उम्र गुज़ारी अब जागा हूँ
उम्र गुज़ारी तब जागा हूँ
सोते सोते उम्र गुज़ारी
नींदों में ही उम्र गुज़ारी
नींद उतारी उम्र गुज़ारी
अब समझा मैं सपना क्या है
दिल की बात उभर आएगी
इस मिट्टी में दफ़्ना क्या है
चलना था उसको इतना के
भूल गया वो थकना क्या है
दिल इतनी सी बात न समझे
यादों में कब रखना क्या है
जब रब है सबकी धड़कन में
तो फिर माला जपना क्या है
जब वादे ही टूट चुके हैं
तो फिर टूटा सपना क्या है
'ज़ाहिर' जब हम रुख़्सत होंगे
तब समझेगा अपना क्या है
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उनकी नशीली आँखें देखी
दिल ने पूछा चखना क्या है
अफ़वाही ज़िंदगी
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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वक्त गुज़रा हुआ सा लग रहा है और सब कुछ हुआ सा लग रहा है तुझको देखा है जबसे दिल पे मेरे कोई जादू हुआ सा लग रहा है तेरी खुशबू जो यादों ने उठाई...
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रात की बात अंधेरों में फैल जाती है धूप लेकिन किसी तारे में टिमटिमाती है इसी तरह तेरी यादों के गाँव से अक्सर तू नहीं पर तेरी ख़ुश्बू तो मिल...