रिश्ते तमाम हैं पर मिलता कोई नहीं
ग़लती से मिल भी जाए तो जुड़ता कोई नहीं
दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं
[साक़ी = one who serves drinks / शराब पेश करने वाले]
रिश्तों की आस खून के क़तरों से कहाँ है
दुनिया में वो भी ख़ुश हैं जिनका कोई नहीं
कैसी ये चोट दी है क्या दिल का हाल है
के ज़ख्म तो गहरा है निशाँ कोई नहीं
कैसा ये शहर तेरा रहते कहाँ हैं लोग
रस्ते तमाम हैं यहाँ मकां कोई नहीं
दिल डूबता है लेकिन देखो ये बेबसी
नज़दीक यहाँ मेरे तिनका कोई नहीं
इस शोर शराबे में किससे कहे कोई
सब बोलते हैं अपनी सुनता कोई नहीं
दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं
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