Thursday, April 4, 2024

मोती

वो फिर याद आया मुझे सोते सोते
वो जो रह गया था मेरा होते होते

वो मोती की माला ज़रा सी बची थी
जो हाथों से छूटी पिरोते पिरोते 

उसे मैंने पाकर तो जन्नत ही पा ली
खुली आँख मेरी मगर रोते रोते

तुझे याद है क्या अँधेरों मे चलना
खुशी से मचलना मुझे टोते टोते 

गुलाबों के फूलों की सूखी किताबें
नहीं आँख थकती तुझे जोते जोते 

ग़ज़ल नज़्म की तो लड़ी लग गई है
तसव्वुर तुम्हारा सँजोते सँजोते 

जो टूटे पड़े थे बिखर के जमी पर
वो मोती उठाए सहर होते होते 

वो फिर याद आया मुझे सोते सोते
वो जो रह गया था मेरा होते होते

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