Thursday, March 22, 2007
लिक्खा है इक गीत नया
जीवन के ताने बाने में
सारा जीवन बीत गया
हर इक मोड़ पे हमने अक्सर
लिक्खा है इक गीत नया
धुंधले से लगते हैं शीशे
पर्तों पर धुंधली यादें
ख़ाबों को जब भी देखा है
याद आया जो बीत गया
हम तो हैं पिछ्डे हमसे ही बिछ्ड़े
हमको ही ताना देते हैं
यूं मिट्टी से अलग हुए के
भूल गये सब रीत हया
सच तो सच है झूठ भी सच है
किस सच की ये बात है दोस्त
हमने तो सच लिक्खा था पर
झूठा सच ही जीत गया
जीवन के ताने बाने में
सारा जीवन बीत गया
हर इक मोड़ पे हमने अक्सर
लिक्खा है इक गीत नया
Monday, March 12, 2007
मेरा सनम है वो
वो बेवफ़ा तो है लेकिन मेरा सनम है वो
मैं ना हुआ मेरे लिये मगर अहम है वो
रुत-ए-हिज्रां फिर आ गई है याद उसकी लिये
ये और बात के इस रुत से भी सुखन है वो
कभी सुकूं नहीं मिलता तो कभी चारागरी
शब-ए-फ़िराक में अक्सर मेरा वहम है वो
अब तो सन्नाटे गूंज कर भी कुछ नहीं कहते
कोई कहता था कभी मेरा ही मेहरम है वो
कैसी उलझन है ज़िन्दगी भी अब फ़साना हुई
नाम जिस्का नहीं भूले मेरी कलम है वो
कौन कहता है के वो आज मेरे पास नहीं
इन हवाओं में शुआओं में हर कदम है वो
वो बेवफ़ा तो है लेकिन मेरा सनम है वो
मैं ना हुआ मेरे लिये मगर अहम है वो
रुत-ए-हिज्रां फिर आ गई है याद उसकी लिये
ये और बात के इस रुत से भी सुखन है वो
Subscribe to:
Posts (Atom)
अफ़वाही ज़िंदगी
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
-
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
-
वक्त गुज़रा हुआ सा लग रहा है और सब कुछ हुआ सा लग रहा है तुझको देखा है जबसे दिल पे मेरे कोई जादू हुआ सा लग रहा है तेरी खुशबू जो यादों ने उठाई...
-
रात की बात अंधेरों में फैल जाती है धूप लेकिन किसी तारे में टिमटिमाती है इसी तरह तेरी यादों के गाँव से अक्सर तू नहीं पर तेरी ख़ुश्बू तो मिल...