ऐसा क्या देखा मेरी आँखों में
के बस ही गए हो निगाहों में
भला किसने तुमको बताया है
के चाँद तारे हैं मेरी आँखों में
बन के दरिया मैं जिसमें मिल जाऊँ
वो समंदर है तेरी आँखों में
माना घाटे का मेरा सौदा है
पर मुनाफ़ा है तेरी आँखों में
देखते हो जो एक टक तो बता
ख्वाब कितने हैं मेरी आँखों में
डर मुझे है के आँख सच ना कहे
राज़ रहते हैं मेरी आँखों में
ये जहां देख लिया देख लिया
कोई जचता नहीं है आँखों में
हर एक पल नया ज़माना है
तुम ज़माने हो मेरी आँखों में
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