Saturday, April 13, 2024

मज़ा

मुझे आज इतना मज़ा आ रहा है 
जो कुछ चाहिए सब मिले जा रहा है 

पहाड़ों से देखो ये क्या दिख रहा है 
खिलौना वहाँ से कहाँ जा रहा है 
मैं बादल पे बैठूँ या मुट्ठी से पकड़ूँ 
मेरे मुँह से देखो धुंआं आ रहा है 

मैं झूलों पे बैठूं उड़ूँ फिर गगन में 
झुलाओ मुझे क्या मज़ा आ रहा है 
न जाने वो क्या है मेरी छत से देखो 
वो पंछी के जैसा उड़े जा रहा है 

चलाएंगे काग़ज़ की कश्ती बना कर 
वो बादल का टुकड़ा इधर आ रहा है 
चलो भीगते हैं सभी बारिशों में 
अरे मोर देखो यही गा रहा है 

मुझे आज इतना मज़ा आ रहा है 
जो कुछ चाहिए सब मिले जा रहा है 

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