Tuesday, April 2, 2024

जवाँ

हम तो दुश्मन को गले से ही लगा रखते हैं 
और ऐसे ही हम खुद को जवाँ रखते हैं 

हमने देखा उन्हे या उनने हमको देखा था 
आगे हम तेरे आइनों के बयां रखते हैं 

जब बरसते हैं आग शोले उनकी आँखों से  
हम लतीफ़ा गुदगुदाता सा नया रखते हैं 

दोस्त होता है दोस्ती मे झगड़ने के लिए 
हम कहाँ और किसी से यूं गिला रखते हैं

ज़ख्म नासूर न बन जाए पुराना होकर 
तेरी यादों से इन्हें ताज़ा छिला रखते हैं 

हमको मालूम है दलीलों से तुम न मानोगे
दुश्मनों मे तेरे हम दोस्त मिला रखते हैं 

कितना समझाओगे दुनिया को मियां बस भी करो 
तर्जुमा के लिए हम भी तो जुबां रखते हैं 

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