Sher-O-Shayri by Vivek Pohre
Monday, August 24, 2026
राम भजन
Saturday, August 22, 2026
अगर आईना न होता
छाता नहीं सुरूर अगर आईना न होता
चढ़ता नहीं फ़ितूर अगर आईना न होता
सूरत न देखता न कमी देखता ख़ुदी में
होता नहीं गुरूर अगर आईना न होता
कहने पे कोई बात कभी मेरे मुख़ालिफ़
गिनते नहीं कुसूर अगर आईना न होता
होता नहीं रक़ीब कोई रश्क भी न होता
होता नहीं मशूर अगर आईना न होता
दिखता न कोई भेस बदल कर के आईने में
सजती ही नहीं हूर 'अगर आईना न होता
Friday, August 21, 2026
क़ता
Thursday, August 20, 2026
सब भूल गए
Wednesday, August 19, 2026
ख़ुद गर्ज़
तेरा हूँ मैं मेरे भी तो तुम हो
Tuesday, August 18, 2026
धोखा है
वक्त के काँटे से जाकर पूछ लो
Friday, August 14, 2026
नींद
Saturday, August 8, 2026
एक दूजे के लिए
राज़ दुनिया को हमारा ये बता या किसने
Friday, August 7, 2026
अरमान
Tuesday, July 14, 2026
मश्वरा
Wednesday, January 14, 2026
अफ़वाही ज़िंदगी
किसको है मिला सुकूँ
किसको है मिली ख़ुशी
अफ़वाही है, अफ़वाही है
अफ़वाही ज़िंदगी
ख़ुशियों की जुस्तजू में
हर कोई मिला दुखी
अफ़वाही है, अफ़वाही है
अफ़वाही ज़िंदगी
जन्नत है काग़ज़ों पर
काग़ज़ी है हूर भी
अफ़वाही है, अफ़वाही है
अफ़वाही ज़िंदगी
जो कुछ न मिल सका है
उसका ही क्यूँ गिला है
ये कैसा सिलसिला है
ये कैसी बे बसी
अफ़वाही है, अफ़वाही है
अफ़वाही ज़िंदगी
पहले तो दिल लगाना
फिर तोड़ कर दिखाना
और दिल से मुस्कुराना
दुनिया ये बदल चुकी
अफ़वाही है, अफ़वाही है
अफ़वाही ज़िंदगी
Friday, December 19, 2025
सुर
मेरे दिल में कोई समाने लगा है
कोई ख़ाब सा फिर से छाने लगा है
तरसती हैं आँखें जिसे देखने को
वो रह रह के फिर याद आने लगा है
शबे हुस्न का एक छोटा सा मंज़र
मुझे दिन दिहाड़े सताने लगा है
मैं ये सोचता हूँ ये रिश्ता है कैसा
सनम ही मेरा दिल जलाने लगा है
बड़ी देर से नींद आई थी मुझको
ये कौन आ के मुझको उठाने लगा है
हवा ले के आई सनम तेरी ख़ुशबू
जवाँ दिल ये मेरा कमाने लगा है
मुआ बेसुरा जाने क्यों ये मेरा दिल
तेरे सुर से फिर सुर मिलाने लगा है
Tuesday, November 18, 2025
नख़रे
आँखें तुम्हारी पढ़ कर हम बातें तुम्हारी कह देंगे
लगने लगा है हम सारे नख़रे तुम्हारे सह लेंगे
पलकें बुझाने से भी तुम मुझको भुला क्या पाओगे
सपने तेरे चुरा कर हम आँखों में तेरी टहलेंगे
तुम हाँ कहो या ना कहो मर्ज़ी तुम्हारी है देखो
जो ना कहो अकेले ही हम ज़िंदगी भर रह लेंगे
नीयत है दिल की 'ज़ाहिर' पानी सी साफ़ ओ साथी
तुम जिस तरह से चाहोगे हम उस तरह से बह लेंगे
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आँखें तेरी ये पढ़ कर हम बातें तुम्हारी कह देंगे
लगने लगा है हम सारे नख़रे तुम्हारे सह लेंगे
फेरो गे मगर तुम अपनी नज़रों को हमसे है ज़ाहिर
सपनों में तेरे आकर हम आँखों में तेरी टह लेंगे
मर्ज़ी तेरी है अर्ज़ी को तू हाँ कहे या ठुकरा दे
ठुकरा भी दे तो हम भी ठोकर में तेरी रह लेंगे
नीयत है दिल की 'ज़ाहिर' पानी सी साफ़ ओ साथी
तुम जिस तरह से चाहोगे हम उस तरह से बह लेंगे
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आँखें तेरी ये पढ़ कर हम बातें तुम्हारी कह देंगे
लगने लगा है हम सारे नख़रे तुम्हारे सह लेंगे
फेरो जो नज़र तुम अपनी गर कहीं ऐसा कुछ फिर हो
सपनों में तेरे आकर हम आँखों में तेरी टह लेंगे
मर्ज़ी तेरी है अर्ज़ी को तू हाँ कहे या ठुकरा दे
ठुकरा भी दे तो हम भी ठोकर में तेरी रह लेंगे
नीयत है दिल की 'ज़ाहिर' पानी सी साफ़ ओ साथी
तुम जिस तरह से चाहोगे हम उस तरह से बह लेंगे
Saturday, March 22, 2025
कलमकार
राम भजन
धियान न लागे मोरा राम का करूँ सोहे तोरा नाम गलियाँ फिरत हूँ चारों पहर अब तोरा नाम जपन मोरा काम धियान न लागे मोरा राम ... जो सुख तोरे नाम...
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ये क्या एहसास है के तू मेरे पास है यूं तो एहसास हैं अनगिनत मगर ये खास है ये क्या एहसास है ज़मीं आकाश है हवाओं में तेरी ख़ातिर कोई विश्वास है...
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काश मिलने के इरादे कभी टलते ही नहीं साथ हम छोड़ कभी राह बदलते ही नहीं पर तरसने के लिए हम न जुदा होते तो एक दूजे के लिए फिर से मचलते ही नहीं ध...
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किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...