Sunday, April 14, 2024

ज़िम्मेदार

मेरे जीवन के मौसम की तू बहार लगता है 
मैं नैया हूँ भँवर में तू मेरी पतवार लगता है 
किसी के मन में तो कोई उतर सकता नहीं लेकिन 
तेरे एहसास की सौगंध मुझे तू यार लगता है 

बुलाने की कभी तुझको ज़रुरत ही नहीं पड़ती 
मेरा बस सोचना तुझको मेरी पुकार लगता है 

मेरी चाहत मेरे सब शौक़ की बातें न मुझसे कर 
तुझे जो ना गवारा हो मुझे बेकार लगता है 

अलावा तेरे कोई भी न हमसे मिलता जुलता है 
तेरा होना मेरे संसार को संसार लगता है 

मेरी गलती पे मुझको टोकना तेरा मुनासिब है 
ख़फ़ा तुम मुझसे हो जाओ तो मन लाचार लगता है 

अगर जीवन में कोई भी मेरे कोई तमाशा हो 
मेरा ज़िम्मा तू रख लेगा तू ज़िम्मेदार लगता है 

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