मेरे जीवन के मौसम की तू बहार लगता है
मैं नैया हूँ भँवर में तू मेरी पतवार लगता है
किसी के मन में तो कोई उतर सकता नहीं लेकिन
तेरे एहसास की सौगंध मुझे तू यार लगता है
बुलाने की कभी तुझको ज़रुरत ही नहीं पड़ती
मेरा बस सोचना तुझको मेरी पुकार लगता है
मेरी चाहत मेरे सब शौक़ की बातें न मुझसे कर
तुझे जो ना गवारा हो मुझे बेकार लगता है
अलावा तेरे कोई भी न हमसे मिलता जुलता है
तेरा होना मेरे संसार को संसार लगता है
मेरी गलती पे मुझको टोकना तेरा मुनासिब है
ख़फ़ा तुम मुझसे हो जाओ तो मन लाचार लगता है
अगर जीवन में कोई भी मेरे कोई तमाशा हो
मेरा ज़िम्मा तू रख लेगा तू ज़िम्मेदार लगता है
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