Saturday, April 6, 2024

मार डाला

जिन्हें चाहतें थी तेरी चाहतों की 
तेरी हसरतों ने उन्हें मार डाला 
तेरी ज़ुल्फ़ की उलझनों से जो निकले
निगाहों ने तेरी उन्हें मार डाल 

तेरी खुशबू जैसा महकता है संदल 
तेरे तन बदन का सुखन है निराला 
जिन्हें तेरी आँखों ने देखा नहीं था 
अदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला 

तेरे सुर्ख होंठों पे लफ्जों के झरने 
नहीं जिसने देखे अकल पे है ताला 
तेरे मयकदे तक न जो आ सके हों  
सदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला  

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