ये वक़्त है
किसे पता
ये एक लफ्ज़
कब का है
ये वक़्त है
तुझे मिला
बस एक दिन
शब् का है
ये वक़्त है
मगर सदा
निकल चुका
सब का है
ये वक़्त है
ये रास्ता
बुना हुआ
रब का है
धियान न लागे मोरा राम का करूँ सोहे तोरा नाम गलियाँ फिरत हूँ चारों पहर अब तोरा नाम जपन मोरा काम धियान न लागे मोरा राम ... जो सुख तोरे नाम...
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