वो कहते रहते हैं अक्सर कभी तो याद करो
और हम कहें के भूलने की तुम फ़र्याद करो
राग़ों मे दौड़ते फिरते हैं वो लहू की तरह
ऐ खुदा अब मेरे जसबे को तुम मुराद करो
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राम भजन
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