नाद का स्वाद लिया समझा वो
जीवन का क्या अर्थ है
मत पूछो मुख से कुछ भी तुम
कहना सुनना व्यर्थ है
आहत तो अनिवार्य नहीं है
अनाहत से जीवन है
सुन ले तू अनाहत की आहट
बिन कानों के शर्त है
धियान न लागे मोरा राम का करूँ सोहे तोरा नाम गलियाँ फिरत हूँ चारों पहर अब तोरा नाम जपन मोरा काम धियान न लागे मोरा राम ... जो सुख तोरे नाम...
No comments:
Post a Comment