नाद का स्वाद लिया समझा वो
जीवन का क्या अर्थ है
मत पूछो मुख से कुछ भी तुम
कहना सुनना व्यर्थ है
आहत तो अनिवार्य नहीं है
अनाहत से जीवन है
सुन ले तू अनाहत की आहट
बिन कानों के शर्त है
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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