हँसी ....
आ ही जाती है
यूँ चिढ़ाने से
मुस्कुराने से
गुदगुदाने से
आओ खेलें साथ
ले लें ये आकाश
अपनी बाहों में
खुशी .....
आ ही जाती है
मुस्कुराने से
खिलखिलाने से
हँसते जाने से
देख ये रौनक
बाजे रे ढोलक
जीवन आँगन में
मदहोशी .....
आ ही जाती है
तेरे आँचल में
लेट कर उसमें
सर छुपाने से
जोने दे तुझको
सोने दे मुझको
तेरी पनाहों में
No comments:
Post a Comment