Monday, May 27, 2024

कुछ बातें

कुछ बातें 
तो रह जाती हैं बातों में 
जो खुद से ही
कभी कहते हैं रातों में 

धुंधली सी
आँखों की बरसातों में 
कुछ बातें 
झूमती हैं हवाओं में 

रह जाती हैं कुछ बातें 
कह जाती हैं कुछ रातें 
और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते 

दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें 

कुछ बातें
याद आती सन्नाटों में 
मुझे पागल 
बना जाती जज़्बातों से

बड़ी उलझन 
शिकस्तों से और मातों से
हैं कुछ बातें
अटक जाती हैं नातों मे 
 
हारना तो नहीं मुझे 
जीतना भी नहीं मुझे 
तो कैसे मैं कहूँ तुझे 

कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे 

तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें

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