कोशिशों पर भी ये तकदीर तो बदल ना सकी
आग को घर भी बनाया मगर ये जल ना सकी
सबक़ पढ़ा था संभलने का मगर हम क्या करें
हम अपनी हद में रहे पर हदें संभल ना सकी
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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