कोशिशों पर भी ये तकदीर तो बदल ना सकी
आग को घर भी बनाया मगर ये जल ना सकी
सबक़ पढ़ा था संभलने का मगर हम क्या करें
हम अपनी हद में रहे पर हदें संभल ना सकी
धियान न लागे मोरा राम का करूँ सोहे तोरा नाम गलियाँ फिरत हूँ चारों पहर अब तोरा नाम जपन मोरा काम धियान न लागे मोरा राम ... जो सुख तोरे नाम...
No comments:
Post a Comment