मेघ के वर्षा जल से सींचो
सींचो जड़ और तन
चक्षु के जल से फिर सींचो
अपना आत्मन
बिजुरी चमके सत्य दिखाने
सत के कर दर्शन
कभी कभी आए जीवन में
वर्षा का मौसम
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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