मेघ के वर्षा जल से सींचो
सींचो जड़ और तन
चक्षु के जल से फिर सींचो
अपना आत्मन
बिजुरी चमके सत्य दिखाने
सत के कर दर्शन
कभी कभी आए जीवन में
वर्षा का मौसम
धियान न लागे मोरा राम का करूँ सोहे तोरा नाम गलियाँ फिरत हूँ चारों पहर अब तोरा नाम जपन मोरा काम धियान न लागे मोरा राम ... जो सुख तोरे नाम...
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