मन चंचल चपल अभिमानी
एक ध्यान नहीं ध्यावत है
सकल विश्व की बात सुनत है
आत्म सूर न लगावत है
किसको है मिला सुकूँ किसको है मिली ख़ुशी अफ़वाही है, अफ़वाही है अफ़वाही ज़िंदगी ख़ुशियों की जुस्तजू में हर कोई मिला दुखी अफ़वाही ...
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