फिर भूख़ लगी मन को रवानी वही
फिर जिस्म की बदन की कहानी वही
मिट्टी के फिर खिलौनों से खेले ज़िंदगी
और खेल खेलने की परेशानी वही
फिर दिल में लगी आग तूफ़ानी वही
फिर क़ैफ़ियत की प्यार की नादानी वही
कुछ पा लिया था खो कर लेकिन तलाश में
खो जाने की है बे-इत्मिनानी वही
फिर याद आ जाने की निशानी वही
फिर भूलने की आदत पुरानी वही
हर शक्ल अलग है और लोग मुख़्तलिफ़
बचपन है बुढ़ापा है जवानी वही
फिर बीज ज़मीं धूप और पानी वही
फिर परवरिश वही निगरानी वही
तकदीर के फ़सानों की मिसालें तमाम
करता है हर कोई बाग़ बानी वही
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