Sunday, May 26, 2024

फिर वही

फिर भूख़ लगी मन को रवानी वही 
फिर जिस्म की बदन की कहानी वही
मिट्टी के फिर खिलौनों से खेले ज़िंदगी
और खेल खेलने की परेशानी वही 

फिर दिल में लगी आग तूफ़ानी वही 
फिर क़ैफ़ियत की प्यार की नादानी वही 
कुछ पा लिया था खो कर लेकिन तलाश में
खो जाने की है बे-इत्मिनानी वही 

फिर याद आ जाने की निशानी वही 
फिर भूलने की आदत पुरानी वही  
हर शक्ल अलग है और लोग मुख़्तलिफ़  
बचपन है बुढ़ापा है जवानी वही 

फिर बीज ज़मीं धूप और पानी वही 
फिर परवरिश वही निगरानी वही 
तकदीर के फ़सानों की मिसालें तमाम 
करता है हर कोई बाग़ बानी वही 

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