बस इक दफ़ा तुझे मिलने की मोहलत ही चाहिए
फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा
आँख भर देख के भर जाए दिल तो क्या ही बात हो
तेरे होंटों के लरज़िशों सी बेबसी भी चाहिए
फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा
फूल इठलाना सीख जाएँ तेरी चाल देख कर
तेरे सबक़ के साथ इनको नसीहत भी चाहिए
फिर इन्हें कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा
बात तस्वीर से बन जाती तो इतना बुरा न था
मेरी दुनिया को तेरे दिल की मुहब्बत भी चाहिए
फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा
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