Tuesday, June 18, 2024

माटी

जीवन क्या है मन की माटी 
मन की माटी तन की माटी 

चाहे कागज हो या पाटी 
या फिर पर्बत या फिर घाटी 
तरुवर हो फल चाहे पाती 
सबके अंदर में है माटी 

माटी खाकर बनती माटी 
माटी बनकर खाती माटी 
सोना कंकर गोबर चांदी 
सब तो माटी है भई माटी 
माटी से मिलकर है माटी 
माटी के बिन सब है माटी 

इसकी कोई नहीं है जाती 
ये बस माटी है बस माटी 
माटी माटी से उठी रे 
माटी माटी मे मिल जानी

जीवन क्या है मन की माटी 
मन की माटी तन की माटी 
माटी माटी से उठी रे 
माटी माटी मे मिल जानी 

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