मन ख़ानाबदोश है मन ख़ानाबदोश है
मन ख़ानाबदोश है ख़ानाबदोश है मन
कहाँ से चला था कहाँ ये रुकेगा
ये जीतेगा किससे कहाँ ये झुकेगा
ये किसको है पता और किसे है खबर
मन ख़ानाबदोश है; ख़ानाबदोश है मन
नज़र में है दुनिया नज़र में ज़माना
जहाँ दिल न चाहे वहाँ फिर न जाना
है मर्ज़ी का मालिक जवाँ सरफ़रोश है
मन ख़ानाबदोश है; ख़ानाबदोश है मन
न है इसको थकना न है इसको रुकना
तमन्ना तो है इसकी जहाँ को है तकना
क़िस्मत में है सफर और डगर पे नज़र
मन ख़ानाबदोश है मन ख़ानाबदोश है
मन ख़ानाबदोश है ख़ानाबदोश है मन
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