इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
ज़ख्म है, ये तो भर ही जाएगा
हम हैं बे होश चलो मान लिया
ये बता होश कैसे आएगा
... इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
कह तो दी थी बात आँखों ने
और कितना इन्हें रुलाएगा
... ज़ख्म है, ये तो भर ही जाएगा
वो मुसाफ़िर है अपनी राहों का
शक्ल शायद ही अब दिखायेगा
... इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
फ़िक्र क्यूँ है के कुछ भी मिल ना सका
कुछ नहीं है तो क्या गवाएगा
... इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
ज़ख्म है, ये तो भर ही जाएगा
इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
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