Monday, June 17, 2024

मन कंगन

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

मन चाहत जो भी नाहि मिले 
मिल जाये कदर वा की ना करे 
अभिमानी प्रपंची हठ ये धरे 
और बाजे छन छन छन 

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

जब ध्यान करे और ज्ञान धरे 
तब एक अग्र चित हाथ धरे 
मन बाहर से आघात करे 
और डोले यह आसन 

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

यह चंचल और चपल मन है 
चिंतन इसको प्रति पल पल है 
आकाश में घिर घिर आये 
जैसे कारे बादल 

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

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