चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन
मन चाहत जो भी नाहि मिले
मिल जाये कदर वा की ना करे
अभिमानी प्रपंची हठ ये धरे
और बाजे छन छन छन
मतवारा मोरा मन
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन
जब ध्यान करे और ज्ञान धरे
तब एक अग्र चित हाथ धरे
मन बाहर से आघात करे
और डोले यह आसन
मतवारा मोरा मन
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन
यह चंचल और चपल मन है
चिंतन इसको प्रति पल पल है
आकाश में घिर घिर आये
जैसे कारे बादल
मतवारा मोरा मन
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन
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