Thursday, March 7, 2024

बेसबब

ऐ ख़ुदा हमको ये फिर से किस जनम का सिला दिया 
मौत मांगी थी मगर फिर ज़िन्दगी से मिला दिया 
हम तो रोते थे के क्यों फिर आ पड़े इस जहान में 
और लोगों ने हमें पुचकार के कुछ पीला दिया 

होश जब आया जहां ने क्या न जाने सिखा दिया 
जो भी सीखा था कभी मैंने वो सब कुछ भुला दिया 
झूठ सच और प्यार नफ़रत शान-ओ-शौक़त एहमियत 
डाल कर मुझमें ये बातें ज़ोर से फिर हिला दिया 

क्या खता मुझसे हुई थी ज़िन्दगी के खेल में 
क्या परख लेनी थी तुझको इस तरह की जेल में 
जब समझ आने लगी थी वो तेरे दर की ख़ुशी 
क्यों भुला कर इस जहां में बेसबब ही बिठा दिया 

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