मसरूफ़ियत में कई काम भूल जाता हूँ
मिलकर करना है सलाम भूल जाता हूँ
दिलचस्प हूँ और अनोखा बोहोत हूँ
खाने हैं मुझको बादाम भूल जाता हूँ
फिर से चल पड़ता हूँ लंबे सफर पे
हासिल किए मैं मक़ाम भूल जाता हूँ
रिश्तों से अक्सर पुकारता हूँ सबको
क्या है के सबके मैं नाम भूल जाता हूँ
मैययत दिवाली या होली के शादी
लोगों में हूँ बदनाम भूल जाता हूँ
सीने से लगकर ही मिलता हूँ सबसे
दुश्मन मैं अपने तमाम भूल जाता हूँ
आज़ाद कोई भी होता नहीं है
याद दाश्त का हूँ ग़ुलाम भूल जाता हूँ
अपनी सफाई में क्या ही कहूँ मैं
खुद पर लगे इल्ज़ाम भूल जाता हूँ
सोचा हुआ लिखना पड़ता है अब तो
जीवन की अब है ये शाम भूल जाता हूँ
पढ़ना पड़ेगा मुझे ये भी लिखकर
खुद के लिखे मैं कलाम भूल जाता हूँ
Wah
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