मंज़िलों की गुफ़्तगू मुझसे अभी होनी नहीं [गुफ़्तगू = conversation]
रास्ते देखे हैं मैंने मंज़िलें देखी नहीं
थक गया था जब मुसाफ़िर कह गया मंज़िल उसे
जिसको मंज़िल कह रहा था वो कभी सोची नहीं
ख़्वाहिशों में रास्तों की रास्ते मिल जाते हैं
मंज़िलों की ख़्वाहिशों में लोग चलते भी नहीं
ज़िन्दगी के इस सफर की बेमिसाली खूब है [बेमिसाली = uniqueness]
मोड़ पे हर, खूब हैं दर, पर कोई खिड़की नहीं [दर = door]
झूठ की होती चमक है क़ाफ़ियों की ही तरहा [क़ाफ़िया = rhyming word]
क़ाफ़ियों से शेर हरदम मुस्तख़म होते नहीं [मुस्तख़म = establish]
रास्ते सौग़ात हैं अब की अभी मिलती हमें [सौग़ात = gift]
चल पड़ो तो, चल पड़ोगे रास्ते मुश्किल सही
मंज़िलों की बात करते हैं वो झूठे लोग हैं
दर असल सच मुच कहीं भी मंज़िलें होती नहीं
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