Tuesday, March 26, 2024

पसीना

लोग रहते हैं यहाँ पर तो मक़ीनों की तरह 
है हुकूमत की भी क़ुदरत तो यक़ीनों की तरह 
कहकशाँ और भी हैं दुनिया की बात करते हो 
ये 
तेरी ज़िन्दगी मिट्टी है ज़मीनों की तरह 

बात करते हो जो सबसे तो ज़हीनों की तरह 
पेश आते हो महफ़िलों में नगीनों की तरह 
आईने में सच कहना तुझे क्या दीखता है?
क्या पेहेनते हो ये चेहरे पे हसीनों की तरह?

राज करते हैं कई लोग ख़लीफ़ों की तरह 
और कुनबे भी बनाते हैं क़बीलों की तरह 
एक क़तरा भी नहीं हैं वो समंदर के यहाँ 
सबको मिट्टी में ही मिलना है पसीनों की तरह 
 

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