Monday, March 4, 2024

इल्तेजा

कोई कहीं कभी किसी जघा तनहा 
मेरे ख्यालों से भी होकर गुज़रेगा 
जिसे मैं देख ही नहीं सकता हूँ अभी 
देख लेना वो ख़ाबों से ही उतरेगा 

ये दिल से आवाज़ें आती हैं इतनी मेरे 
के इनको चाहूँ तो भी झूठा कैसे कहूँ 
कोई कशिश तो आकर पास मेरे 
है कानों में क्या कहती है ये किससे कहूँ 

मैं उसका हाथ प्यार से जो हाथ में लूँ 
मुझे यक़ीन है कभी न वो छोड़ेगा 
जिसे मैं देख भी नहीं सकता हूँ अभी 
देख लेना वो ख़ाबों से ही उतरेगा 

चले आओ चले आओ 
मुझे ऐसे न तड़पाओ 
यूँ धड़कन में धड़क कर तुम 
रग़ों में ही समा जाओ 

ये इल्तेजा है बेचारे इस दिल की मेरे 
कभी तो बात मेरी भी वो सुन लेगा 
जिसे मैं देख भी नहीं सकता हूँ अभी 
देख लेना वो ख़ाबों से ही उतरेगा 


Male
Female

No comments:

Post a Comment

अफ़वाही ज़िंदगी

किसको है मिला सुकूँ   किसको है मिली ख़ुशी   अफ़वाही है, अफ़वाही है   अफ़वाही ज़िंदगी   ख़ुशियों की जुस्तजू में   हर कोई मिला दुखी   अफ़वाही ...