Sunday, March 10, 2024

ज़िंदा हूँ मैं

ये पूछते हैं लोग कैसे ज़िंदा हूँ मैं 
साँसे नहीं रही तो कैसे ज़िंदा हूँ मैं 
ये मानता हूँ जिस्म में साँसे नहीं रही 
ज़ेहनों में दोस्तों के वैसे ज़िंदा हूँ मैं 

कह डालो जनाज़े में मेरे कुछ भी मगर 
अंदाज़ ऐसे रखना जैसे ज़िंदा हूँ मैं 

इतना भी मेरी मैय्यत पे दुःख ना करो यार 
के मुझको लगे जैसे तैसे ज़िंदा हूँ मैं 

तरकीब ये लगाई थी शेरों की शक्ल में 
लिख डाले हैं ख़याल ऐसे ज़िंदा हूँ मैं 

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