Thursday, July 4, 2024

याद

भूल गया मैं जाने कब से 
कब से जाने भूल गया 
एक ज़माना था पल भर का 
पल भर पहले भूल गया 

मुझसे झगड़ा करना तय था 
सोच के ही आया था वो 
मेरी बातें सुनकर वो भी 
झगड़ा करना भूल गया 

मैं तो ठहरा एक बेचारा 
इन्सां कितना याद रखे 
गलती तेरी है क्यों की तू 
याद दिलाना भूल गया 

ऐसा क्या हुआ है तुमको 
चेहरा क्यूँ मुरझाया है 
कौन सी बातें याद है तुझको 
मैं तो सब कुछ भूल गया 

No comments:

Post a Comment

अफ़वाही ज़िंदगी

किसको है मिला सुकूँ   किसको है मिली ख़ुशी   अफ़वाही है, अफ़वाही है   अफ़वाही ज़िंदगी   ख़ुशियों की जुस्तजू में   हर कोई मिला दुखी   अफ़वाही ...