कुछ कहो, .. कुछ तो कहो
यूँ ही वीरान से जज़्बों के ख़ाब में ना रहो
ख़ाब का क्या है आज है फिर ना होगा कभी
भूल जाना है एक दिन ख़ाबों को सभी
ग़ुबार होंगे एक दिन इनको ना सहो
कुछ कहो, .. कुछ तो कहो
हाँ कहना नहीं है तो क्या तेरी आँखें चुप हैं
जगह कम है, और छुपाने को कितना कुछ है
संभल रही हैं मचलती हुई बातें तेरे दिल में
मुझे पता है के तुम हो अभी कितनी मुश्किल में
ना सुनो खुद की,
और खुद से ही कहो
कुछ कहो, .. कुछ तो कहो
तेरा पैगाम देखा जिसमे कुछ भी ना था
जैसे सोचा मुझे तूने और भुला भी दिया
मुझे पूछना है तुझसे गर इजाजत करो
बात करनी है तुझसे अगर हाँ तुम कहो
कुछ कहो, .. कुछ तो कहो
यूँ ही वीरान से जज़्बों के ख़ाब में ना रहो
ख़ाब का क्या है आज है फिर ना होगा कभी
भूल जाना है एक दिन ख़ाबों को सभी
कुछ कहो, .. कुछ तो कहो
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