Wednesday, July 17, 2024

बिजली

आज फिर बारिश हुई 
फिर भी हम रोए नहीं 
रात भर बिजली गिरी 
और हम सोए नहीं 

करवटों से सिलवटें 
रात भर बढ़ती रही 
फैसलों के वास्ते 
हम कहीं खोए नहीं 

ये भी कैसी बात है जो 
लफ़्ज़ में ढलती नहीं 
अपने दामन मुह छुपाकर 
कबसे हम रोए नहीं 

ये भी सच है इस में तेरी 
और मेरी गलती नहीं 
रात भर बिजली गिरी 
और हम सोए नहीं 

आज फिर बारिश हुई 
फिर भी हम रोए नहीं 
रात भर बिजली गिरी 
और हम सोए नहीं 

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