आदतों को आदतों की आदतें होती रही
ता उमर ऐसे गुलों की बारिशें होती रही
इतना भी क्या सोचना सोचे हुए हंगाम पे
ज़िंदगी आदत तले अपनी बसर होती रही
हमने ना सोचा ना समझा ना ही पछताए कभी
सोच कर बैठे थे जो उनको खलिश होती रही
हर क़दम पर पाएमानी की ज़रूरत थी उन्हें
हर क़दम पर जिनके हरदम ताइदी होती रही
वो नहीं नादान जिनके पर अभी आए नहीं
वो इशारों मे हैं जिनकी परवरिश होती रही
एक बच्चे नें सिखाया ज़िंदगी का फ़लसफ़ा
जब तलक वो उठ ना पाया कोशिशें होती रही
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