Thursday, July 18, 2024

सुहाना सफ़र

बात क्या है के परेशान मुझको होना है 
जो कुछ मिला था यहाँ पर वही तो खोना है 
दिन गुज़ारे हैं सुहाने किसी सफ़र की तरह 
रात आती है देख अब तो मुझे सोना है

ये जो शुमार हैं हिसाब और किताबों में  
इन्हें सुकून से जगना है और ना सोना है 
ये उजालों में ताश कारी करते मिलते हैं 
इनको रातों में अंधेरों में भार ढोना है || दिन गुज़ारे हैं....

फिर उजाला ये नए दिन की तरह आएगा 
आशनाओं से मेरे फिर मुझे मिलाएगा 
जो सो गए थे बीती रात वो भी आएंगे 
यही लिखा है गर्दिशों में यही होना है || दिन गुज़ारे हैं.... 

मगर ये ज़िंदगी है घर है दिन में रहने को 
सुकून से रहो औरों को चैन रहने दो 
धूप आएगी तुझे तोहफे देके जाएगी 
काम तेरा है के मिट्टी को बस भिगोना है || दिन गुज़ारे हैं....  



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