निगाहे तीर ए चाहत तार अकस था
जो देखा तो जिगर के पार बस था
तेरे आशिक़ को जीने के लिए तो
तेरी सूरत का इक दीदार बस था
किताबों में तेरी तस्वीर देखी
तसव्वुर को तेरा किरदार बस था
तेरा कमसिन सा चेहरा याद रखना
मुझे इतना ही कारोबार बस था
मनाना फिर जरूरी तो नहीं था
तेरी आँखों का इक इनकार बस था
मैं कह कर भी उसे फिर क्या ही करता
मेरी चुप्पी का पहला वार बस था
जलाने के लिए खाबो को मेरे
तेरे शोले का इक अंगार बस था
समझ आया न था पहले ये मुझको
तेरी किश्ती का मैं पतवार बस था
जला हूँ दूध की चाहत में मुँह से
तेरा धोखा मुझे यकबार बस था
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