Thursday, August 20, 2026

सब भूल गए

ढलता सूरज चिल्लाता है
रातों का हुनर सब भूल गए

गाड़ी में अकेले फिरते हैं 
छातों का हुनर सब भूल गए

गन्ना मिल में ही जाता है
दाँतों का हुनर सब भूल गए

वालिद माँ भाई ब्रो हैं अब 
नातों का हुनर सब भूल गए

लहजे भी बदेसी ज़ाहिर है
बातों का हुनर सब भूल गए

अब क्रेडिट नोट ही चलता है
खातों का हुनर सब भूल गए

हुक़्मों की ताबीरें होंगी 
हाथों का हुनर सब भूल गए

तारों की जमातों से सीखी 
सातों का हुनर सब भूल गए

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