Tuesday, July 14, 2026

मश्वरा

ज़िन्दगी में तेरी मेरा कोई भी काम नहीं
तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम नहीं

मश्वरा किस से करूं कौन सलाहें देगा
राज़ तेरा है अभी राज़ सर ए आम नहीं

तुम संभालो न छलक जाए कहीं हाथों से
ख़ून है दिल का मिरे मय कशी का जाम नहीं

झूठ कहते हो तसल्ली मिली है दुनिया से
ये तो ज़ाहिर है तुझे आज भी आराम नहीं

तज्रुबा है मुझे ज़ाहिर किसी कि फ़िक्र नहीं
है नहीं कोई यहाँ जो कहीं बदनाम नहीं

मुझ से पूछा न करो ज़िन्दगी के हंगामे
है सराबों सा ये जीवन कोई ईनाम नहीं


तलातुम

क़िताब ए जिंदगी में बाब हूं सितारों का मैं रोशनी हूं तलातुम हूं चाँद तारों का हिजाब रुख पे बहुत मैने ओढ़ रखे हैं मुझे पता नहीं है कुछ मेरे दया...