धियान न लागे मोरा राम
का करूँ सोहे तोरा नाम
गलियाँ फिरत हूँ चारों पहर अब
तोरा नाम जपन मोरा काम
धियान न लागे मोरा राम ...
जो सुख तोरे नाम में आवे
इतनों कहीं कछु हूँ न सुहावे
राम कहत है मन सन मोरा
रकत हाड़ अरु चाम
धियान न लागे मोरा राम ...
दुःख कछु नाहि सुख कछु नाही
भरम है सबरे मानुस का ही
लागी लगन अब मन को तिहारी
तोरा मंदिर ही मोरा धाम
धियान न लागे मोरा राम ...
आवत जावत खावत धावत
करनी पर आपन पछतावत
अनपढ़ मन बस समय गवावत
भोर की हुई गई साम
धियान न लागे मोरा राम ...