Tuesday, February 11, 2025

कोई पागल समझता है

असली शायर: कुमार विश्वास 

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
कोई ठोकर से है मुझको हुआ घायल समझता है
मैं घायल जानता हूँ हूँ मैं दीवाना मैं पागल हूँ
मगर दीवाना क्यों घायल है ये पागल समझता है

ये लड्डू है बना घी से तभी ये टेढ़ा मेढ़ा है
मगर तू हाय क्यों जाने इसे मगदल समझता है

कहाँ किस रासते आती है जाड़ों में किनारों से 
हवा घुसती कहाँ से है तेरा कंबल समझता है

कभी दिल्ली का बाशिंदा चला जाता है गर ऊटी
तमिल नाडू को बेचारा हरा केरल समझता है

मेरे बाबा जो कहते थे वो सहगल और है कोई 
मेरा बेटा किसी रैपर को ही सहगल समझता है

दिखाकर और सिखाकर भी किसी को कुछ नहीं समझा 
मगर 'ज़ाहिर' तो आँखों के हर इक सिग्नल समझता है

कभी भी छोड़ना मत अपनी माँ का पाक सा पल्लू
ये तेरा आसमाँ है जिसको तू आँचल समझता है
(आस माँ की आसमाँ है जिसे आँचल समझता है )

No comments:

Post a Comment

अफ़वाही ज़िंदगी

किसको है मिला सुकूँ   किसको है मिली ख़ुशी   अफ़वाही है, अफ़वाही है   अफ़वाही ज़िंदगी   ख़ुशियों की जुस्तजू में   हर कोई मिला दुखी   अफ़वाही ...