Thursday, December 5, 2024

हद करते हो

Bahr: 22-22-22-22

मेरी बातें ज़द करते हो 
अपनी तो लज़्ज़त करते हो 
कैसे मानोगे के तुम तो 
हद करते हो हद करते हो

देखो अब हम घर आये हैं
दिन काला हम कर आये हैं
अंगड़ाई तुम क्यूँ भरते हो
हद करते हो हद करते हो

मेहताबी है आँखें तेरी
दानाई हैं बातें मेरी
रोशन रातें गुम करते हो
हद करते हो हद करते हो

तौबा हमने की है दिल से
धड़कन थामी है मुश्किल से
क्यूँ धड़कन गड़बड़ करते हो
हद करते हो हद करते हो

मंज़िल जो थी अब रस्ता है
अब जब सब लगता सस्ता है
अब किस मंज़िल से डरते हो
हद करते हो हद करते हो

'ज़ाहिर' चाहत जब है दिल में
बैठे हो तुम किस मुश्किल में
हद की बातें क्यूँ करते हो
हद करते हो हद करते हो

जब भी ग़ज़लें पढ़ता हूँ मैं
या कह लो के मढ़ता हूँ मैं 
वावाही का दम भरते हो 
हद करते हो हद करते हो

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