Wednesday, December 4, 2024

याद आना चाहता हूँ

असली शायर: फ़हमी बदायूनी 

मैं बस के ये बताना चाहता हूँ
मैं तुमसे दूर जाना चाहता हूँ
के हिज्र में किसी कमी की तरह
मैं तुमको याद आना चाहता हूँ

ये तुमसे दिल धड़क रहा है मेरा 
मैं इसका मेहनताना चाहता हूँ

ये कैसा वक़्त हो चला है अभी 
मैं वो अपना ज़माना चाहता हूँ

ये किसने बद्तमीज़ हद बनाई
मैं इसके पार जाना चाहता हूँ

बस एक शै पे क्या उछलते हो तुम
मैं तुमसे मात खाना चाहता हूँ

तुम मेरे हो के तुम मेरे ही तो हो 
'ज़ाहिर' है तुमको पाना चाहता हूँ

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