तेरी अदीम निगाहों ने बे पनाह किया
बिना किये मुझे आगाह ही तबाह किया
ये किस तरह कि है उल्फत के मेरी फ़िक्र नहीं
न कैद ही किया मुझको न ही रियाह किया
[अदीम = Unique, आगाह = Warn, रियाह = Set free]
शराब रात कि बूंदों से बारहाती रही
तो जाम ने भी उसे मन्ज़रे गुलाब किया
[बारहाती = Again and Again = Multiple Occurrence]
न गिन सका है कोई भी दिए ये ज़ख्म तेरे
न जाने कितनों ने आकर यही हिसाब किया
ये तार तार से दिल में जो साँस बच के रही
उसे भी हैरते 'ज़ाहिर' ने है मज़ार किया
ये क्या मज़ाह किया है नसीब ने मुझसे
के मैंने अपने ही क़ातिल से रस्मो राह किया
[मज़ाह = Joke, रस्मो राह = Contact/Relation]
No comments:
Post a Comment