Friday, August 30, 2024

मैं इंसान हूँ

मैं इंसान हूँ, मैं इंसान हूँ
खुदी पे मैं सबसे महरबान हूँ 
फ़रिश्ता सा हूँ मैं किसी की नज़र में 
किसी की नज़र में मैं शैतान हूँ 

मैं इंसान हूँ, मैं इंसान हूँ

अगर कोई कहता है मैं नासमझ हूँ 
तो खुद को समझता मैं नादान हूँ 
कभी हूँ शफ़ाक़त कभी बेवफ़ा हूँ 
कभी रंजिशी का मैं इलज़ाम हूँ 

कभी देवताओं का ऐलान हूँ मैं 
कभी खुद खुदा का मैं मुख्तार हूँ 
कभी फ़िक्र-ए-खुद हूँ कभी मस्त बे हिस 
कभी खुद पे खुद ही मैं हैरान हूँ 

मैं इंसान हूँ, मैं इंसान हूँ

कभी मैं शराफ़त की हूँ बानगी तो 
कभी बद-तमीज़ी का परवान हूँ 
जूनून-ए-नफ़ा है कभी मेरे सर पे 
नतीजन यक़ीनन मैं नुक्सान हूँ 

कभी बे ग़रज़ धूप सी इक किरण हूँ 
कभी जंगलों का मैं तूफ़ान हूँ 
है ख्वाहिश ख़ुशी की मुझे ज़िन्दगी में 
ख़ुशी के लिए मैं परेशान हूँ 

मैं इंसान हूँ, मैं इंसान हूँ

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